महान रूसी अक्‍टूबर क्रांति का विश्‍व-ऐतिहासिक महत्‍व और उसके कुछ ठोस सबक

~ शेखर 25 अक्‍टूबर, 1917 (नये कैलेंडर के अनुसार 7 नवंबर, 1917) के दिन, आज से 103 वर्ष पूर्व रूस में बोल्‍शेविकों द्वारा संगठित सर्वहारा समाजवादी क्रांति ने पूंजीपति वर्ग का तख्‍ता पलट दिया था और सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्‍व की स्‍थापना की थी। इसके पूर्व 18 मार्च 1871 को पेरिस में मात्र तीन महीने … More महान रूसी अक्‍टूबर क्रांति का विश्‍व-ऐतिहासिक महत्‍व और उसके कुछ ठोस सबक

The Great October Socialist Revolution: Torch Bearer of All Future Proletarian-Led Revolutions

The Great October Socialist Revolution took place on October 25, 1917. Led by an entirely different type of proletarian party i.e. the Leninist Party that put into practice the concept of a communist party as the general headquarter of the armies of the proletariat fighting to overthrow the rule of exploitation  by capital, the October … More The Great October Socialist Revolution: Torch Bearer of All Future Proletarian-Led Revolutions

बिहार चुनाव : महागठबंधन की जीत और फासीवाद

[शेखर] [यह लेख बिहार चुनाव 2020 पर ‘यथार्थ’ पत्रिका में लेख श्रृंखला में तीसरा और अंतिम लेख है। पहले और दूसरे लेख ‘यथार्थ’ के सितंबर (#5) और अक्टूबर (#6) अंकों में छपे थे।] बिहार चुनाव के पहले दो चरण के मतदान हो चुके हैं और यह लेख लिखते वक्त 7 नवंबर को होने वाले तीसरे … More बिहार चुनाव : महागठबंधन की जीत और फासीवाद

श्रम सुधार : श्रम संहिताओं का आगमन, श्रमिक अधिकारों का अवसान

एस. राज // श्रम कानूनों और मजदूर वर्ग के सभी जनवादी अधिकारों को ध्वस्त करना इतिहास में किसी भी फासीवादी सरकार के प्रमुख लक्ष्यों में एक रहा है। इसी तरह भाजपा-आरएसएस की मोदी सरकार ने भी 2014 आम चुनाव जीत कर सत्ता में आने के बाद से ही देश में 44 केंद्रीय श्रम कानूनों की … More श्रम सुधार : श्रम संहिताओं का आगमन, श्रमिक अधिकारों का अवसान

बिहार चुनाव : जनविरोधी सरकार से हिसाब चुकता करें!

शेखर // पूंजीवादी-साम्राज्‍यवादी तथा फासीवादी लूट की व्‍यवस्‍था को खत्‍म करने के लिए समाजवाद के लक्ष्‍य के साथ आगे बढ़ें! [पिछले अंक से जारी] बिहार चुनाव में अब एक महीने से भी कम का समय रह गया है। पहले दौर का नामांकन दो दिनों बाद शुरू होने वाला है। चुनावी पार्टियों के बीच आपसी गठबंधन … More बिहार चुनाव : जनविरोधी सरकार से हिसाब चुकता करें!

फासीवाद की नई प्रयोगशाला – यूपी मॉडल

गोर्गी दिमित्रोव ने सही कहा था कि “कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की 13वीं कार्यकारी समिति ने फासीवाद की बिल्कुल सटीक परिभाषा दी है कि फासीवाद वित्तीय पूंजी के सबसे प्रतिक्रियावादी, सबसे अंधराष्ट्रवादी और सबसे साम्राज्यवादी तत्वों की खुली आतंकी तानाशाही को कहते हैं।” लेकिन अगर आम लोगों को फासीवाद समझना हो तो वे पिछले कुछ दिनों में … More फासीवाद की नई प्रयोगशाला – यूपी मॉडल

ARRIVAL OF LABOUR CODES: OBITUARY OF WORKERS’ RIGHTS

S Raj // Dismantling labour laws and all democratic rights of the working class has always been the top priority of any fascist government throughout history. Similarly, the Modi (BJP-RSS) Government had set the task of dismantling the mechanism of 44 central labour laws in the country and replacing them with 4 labour codes as … More ARRIVAL OF LABOUR CODES: OBITUARY OF WORKERS’ RIGHTS

BIHAR ELECTIONS: TAKE REVENGE BY BALLOT ON ANTI-PEOPLE GOVERNMENT AND PARTIES – UNITE FOR A SOCIALIST FUTURE IN THE LEADERSHIP OF THE WORKING CLASS

Shekhar // [In continuation from previous issue] Less than a month is left now for Bihar Assembly elections. But for the poor and the toilers, the question of whom to vote and why still remains a ‘mystery’ as independent Left or Revolutionary Left alliance didn’t appear at all. Pre-election alliance of Parliamentary Left with RJD … More BIHAR ELECTIONS: TAKE REVENGE BY BALLOT ON ANTI-PEOPLE GOVERNMENT AND PARTIES – UNITE FOR A SOCIALIST FUTURE IN THE LEADERSHIP OF THE WORKING CLASS

बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और पूंजीवाद : आंदोलनरत युवाओं के नाम

रोजगार का सम्बंध उद्योग और अर्थव्यवस्था के सतत विकास से, यानी, दूसरे शब्दों में, आर्थिक गतिविधियों में मौजूद चहल-पहल और इसकी चहुंमुखी वृद्धि से है। मुनाफा की अंधी दौड़ पूंजीवाद की रूह होती है। पूंजीवाद में जो भी चीज़ होती या की जाती है उसकी यही प्रेरक शक्ति है। समाज के लिए इसके एक हद … More बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और पूंजीवाद : आंदोलनरत युवाओं के नाम

#9बजे9मिनट की सफलता पर

कुछ ऐसे “शानदार” और “उत्साहवर्धक” नजारे रहे कल रात में। सवाल है इसके माध्यम से क्या हम देश के युवाओं के राजनीतिक मूड का अंदाज़ा लगा सकते हैं? हा, जरूर, लेकिन ऐसा करते वक्त थोड़ी ईमानदारी की जरूरत होगी। पहले सोशल मीडिया की बात करें, तो पूरे देश में “9बजे 9मिनट” ट्रेंड कर रहा था। … More #9बजे9मिनट की सफलता पर