कार्पोरेट के नए हिमायती क्‍या हैं और वे क्रांतिकारियों से किस तरह लड़ते हैं [1]

पी.आर.सी., सी.पी.आई. (एम.एल.) मूलतः 'यथार्थ' हिंदी मासिक पत्रिका के 11वें (मार्च 2021)अंक में प्रकाशित। लेख का अंग्रेजी संस्करण पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। [प्रथम किश्त][1] मुख्य बात पर आने से पहले मैं आपका परिचय माओवादी कार्यकर्ताओं के एक समूह के मुखिया “बुद्धिजीवी कुनबे” से कराना जरूरी समझता हूं जिन्होनें हाल के दिनों में या कहें एक अरसे से क्रांतिकारियों को ‘शिक्षित’ करने की प्रचंड ज़िम्मेदारी अपने सिर ओढ़ी हुई है।[2] वे प्रकांड... Continue Reading →

दिल्ली बॉर्डर पर इफ्टू (सर्वहारा)

एस. राज / जारी किसान आंदोलन में मजदूर वर्गीय हस्तक्षेप (18-26 जनवरी 2021) इंडियन फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियंस (सर्वहारा) [इफ्टू (सर्वहारा)] द्वारा जारी किसान आंदोलन में मजदूर-वर्गीय दृष्टिकोण से हस्तक्षेप करने हेतु एक जमीनी अभियान का आयोजन किया गया। इस हस्तक्षेप का लक्ष्य था मजदूर वर्ग के प्रतिनिधि होने के बतौर किसानों की मुक्ति और... Continue Reading →

किसानों की मुक्ति और मजदूर वर्ग

(कामरेड सुनील पाल के शहदात दिवस 29 दिसंबर 2020 के अवसर पर पीआरसी सीपीआई (एमएल) द्वारा आईएमए हॉल, गांधी मैदान पटना आयोजित कंवेशन में पेश प्रपत्र) सम्मेलन की पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें प्रपत्र पेश करते हुए हम सर्वप्रथम किसान आंदोलन के फलस्वरूप व्यापक किसान आबादी के बीच आई नई जागृति का हम गर्मजोशी से स्वागत करते हैं! हम बेसब्री... Continue Reading →

आज का युवा वर्ग और स्तालिन की विरासत

[सोवियत समाजवाद के निर्माता और विश्व सर्वहारा के महान नेता व शिक्षक कॉमरेड स्तालिन के जन्मदिवस पर पीडीवाईएक द्वारा जारी लेख] 21 दिसंबर 2020 अगर बात युवा वर्ग की हो और साथ में स्तालिन की क्रांतिकारी विरासत पर भी चर्चा हो रही हो, तो जर्द बर्फीली सर्दी में भी रगों में गरमी दौड़ने लगती है।... Continue Reading →

एंगेल्स का पुनरावलोकन : पितृसत्ता की ऐतिहासिक भौतिकवादी पुनर्रचना

[अमिता कुमारी] वर्तमान में हमारे बीच के करीब सभी समुदाय पितृसत्तात्मक हैं; और जब से लिखित दस्तावेजों द्वारा हमें इतिहास ज्ञात हैं, तब से समाज ऐसा ही है। तब क्या यह समझा जाए कि पितृसत्ता हमारे बीच हमेशा से है? क्या स्त्री-परवशता एक स्वाभाविक/ प्राकृतिक परिघटना है? एक मार्क्सवादी इस पारंपरिक मत को मानने वाला आखिरी... Continue Reading →

[बुटाणा बलात्कार] पुलिस हिरासत में हैवानियत की शिकार नाबालिग दलित महिला

दो पुलिस कर्मियों की दर्दनाक हत्या बुटाणा, जिला सोनीपत, हरियाणा (दिल्ली से 82 किमी पश्चिम) [एस. वी. सिंह] जींद शहर में पढ़ते हुए रीना (बदला हुआ नाम) और अमित एक दूसरे के नज़दीक आए, मित्रता हुई और एक दूसरे के लिए चाहत बढ़ती गई। मार्च में देशभर में लॉक डाउन घोषित हुई और स्कूल-कॉलेज बंद... Continue Reading →

[पुस्तक परिचय] शेतकर्याची आसुड (किसान का चाबुक) – जोतीराव फुले

[एम. असीम] जोतीराव (जोतीबा) फुले 19वीं सदी के भारत के अग्रणी चिंतक थे। उन्होंने भारतीय समाज को सदियों से जकड़े वर्ण-जाति और पितृसत्तात्मक ब्राह्मणवादी विचार के विरुद्ध संघर्ष को आधुनिक समता-बंधुत्व-स्वतंत्रता की जनवादी दृष्टि वाला वैचारिक-सैद्धांतिक आधार प्रदान किया, सभी के लिए समान सार्वजनिक शिक्षा का सवाल उठाया, औपनिवेशिक व्यवस्था में किसान-दस्तकार-श्रमिक तबकों के निर्मम... Continue Reading →

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