कार्पोरेट के नए हिमायती क्‍या हैं और वे क्रांतिकारियों से किस तरह लड़ते हैं [1]

पी.आर.सी., सी.पी.आई. (एम.एल.) मूलतः 'यथार्थ' हिंदी मासिक पत्रिका के 11वें (मार्च 2021)अंक में प्रकाशित। लेख का अंग्रेजी संस्करण पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। [प्रथम किश्त][1] मुख्य बात पर आने से पहले मैं आपका परिचय माओवादी कार्यकर्ताओं के एक समूह के मुखिया “बुद्धिजीवी कुनबे” से कराना जरूरी समझता हूं जिन्होनें हाल के दिनों में या कहें एक अरसे से क्रांतिकारियों को ‘शिक्षित’ करने की प्रचंड ज़िम्मेदारी अपने सिर ओढ़ी हुई है।[2] वे प्रकांड... Continue Reading →

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