- आकांक्षा, ‘सर्वहारा’ अखबार (अंक 52) – 1 जून 2024
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बिजली की बढ़ती कीमतों और आम लोगों की जेबें हल्की करते बिजली बिल के पीछे की सच्चाई का बड़ा खुलासा ‘फिनांशीयल टाइम्स’ में विगत 22 मई को छपी रिपोर्ट में किया गया है। इस अखबार ने पिछले कुछ सालों में 2014 में शुरू हुए अडानी के कोयला घोटाले पर 25 विस्तृत रिपोर्टें छापी हैं। इस श्रृखला में सबसे हालिया रिपोर्ट बताती है कि कैसे अडानी समूह इंडोनेशिया की एक खदान से निम्न स्तर का सस्ता कोयला (गुणवत्ता : 3500 कैलोरी प्रति किलोग्राम) खरीदा है और उसे भारत में टॉप क्वालिटी (गुणवत्ता : 6000 कैलोरी प्रति किलोग्राम) का कोयला बता कर तमिलनाडु की सरकारी कंपनी ‘टैंगेडको’ को उंचे दामों पर बेच देता है। 2013 में इसी घटिया क्वालिटी के कोयले के एक शिपमेंट की कीमत इंडोनेशियाई कंपनी ने 28 डॉलर प्रति टन रखी थी। भारत पहुंचे पर यही शिपमेंट टैंगेडको को 92 डॉलर प्रति टन में बेचा गया। ऐसे एक-दो गिने चुने नहीं, बल्कि दर्जनों मामले हैं जिसमें लाखों टन कोयले की कीमतों के साथ घपला किया गया है। केवल 2014 के ऐसे कुल शिपमेंट में से 22 शिपमेंट की जांच फिनांशियल टाइम्स ने की है जिसमें लगभग 15 लख टन कोयले को औसत 86 डॉलर प्रति टन के दाम से बेचा गया जो कि मार्केट भाव से कई गुना ज्यादा है। दूसरे दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि केवल 2014 में कुल 32 शिपमेंट में घटिया क्वालिटी के 21 लाख टन कोयले की डिलीवरी टैंगेडको को 91 डॉलर प्रति टन के हिसाब से की गयी।
तमिलनाडु के एक एनजीओ ‘अरप्पोर इयक्कम’, जिसने 2018 में अडानी ग्रुप द्वारा कोयले की कीमतों में घोटाले के खिलाफ शिकायत की थी, का कहना है कि “पिछले एक दशक से टैंगेडको को हर साल [अरबों रुपये] का भारी नुकसान हो रहा है। हमें यह समझना चाहिए कि इसका सीधा असर आम आदमी के लिए उच्च बिजली दरों में होगा और यह आम आदमी को बहुत प्रभावित कर रहा है।” इस एनजीओ का अनुमान है कि 2012 और 2016 के बीच टैंगेडको की कोयले की खरीद में कुल 60 अरब रुपये (720 मिलियन डॉलर) बर्बाद हुए। एनजीओ के संयोजक, जयराम वेंकटेशन ने अखबार को बताया कि, “इसमें से, यह देखते हुए कि अडानी ने लगभग आधे की आपूर्ति की, अकेले अडानी द्वारा किया गया नुकसान 3,000 करोड़ रुपये (360 मिलियन डॉलर) होगा।” यह हजारों करोड़ रूपए किसके हैं जिसे सरकारें आंख बंद करके अडानी की झोली में डाल रही है? यह हमारे और आपके द्वारा अलग-अलग स्वरूपों में दिए जा रहे टैक्स का पैसा है, मजदूरों-मेहनतकशों की खून-पसीने की कमाई का हिस्सा है जो जनता से चोरी-छुपे अडानी को भेंट में दिया जा रहा है। यह यूंही नहीं है कि 2014 से ले कर 2022 के बीच अडानी की कमाई 8 अरब डॉलर से 140 अरब डॉलर हो गयी! मोदी सरकार की कृपा से अडानी समूह भारत की 10 लिस्टेड कंपनियों को नियंत्रित करता है और यह भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी और निजी पोर्ट ऑपरेटर कंपनी है। अडानी समूह की 60 फीसदी आय कोयला-सम्बंधित कारोबारों से ही आती है। 12 अक्तूबर 2023 को इसी अखबार में छपी रिपोर्ट में 2019 से 2021 के 32 महीनों में 30 शिपमेंट को करीब से जांचा गया। इन सभी में कोयले की कीमतों को कई गुना बढ़ा कर पेश किया गया था जिसमें शिपमेंट के कुल मूल्य में 700 लाख डॉलर की वृद्धि देखी गयी।
इस घोटाले में बढ़िया क्वालिटी के कोयले की जगह सरकारों को निम्न गुणवत्ता का कोयला दोगुने-तीन गुने दाम पर बेचे जाने का खामियाजा एकमात्र जनता को भोगना पड़ता है। पहला तो सीधे तौर पर जनता के टैक्स और गाढ़ी कमाई का पैसा अडानी समूह को कोयले की बढ़ी हुई कीमतों के रूप में दे दिया जाता है। दूसरा, कोयले के इन बढ़े हुए दामों का प्रभाव बिजली की कीमतों पर पड़ता है और आम लोगों के लिए बिजली महंगी से और महंगी होती चली जाती है। तीसरा यह कि इस खराब क्वालिटी के कोयले को जलाने से वायु प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है और अंततः इससे होने वाली कई तरह की बिमारियों का दंश भी आम जनता को ही भोगना पड़ता है। टॉप क्वालिटी का महंगा कोयला सरकारें इसलिए खरीदती हैं कि उसे जलाने से वायु प्रदूषण कम होगा क्योंकि 6000 कैलोरी प्रति किलोग्राम गुणवत्ता वाले कोयले की कम मात्रा को जला कर 3500 कैलोरी प्रति किलोग्राम वाले कोयले से ज्यादा उर्जा पैदा की जा सकती है। लेकिन यहां टॉप क्वालिटी के महंगे कोयले की कीमत चुका कर भी उन्हें घटिया क्वालिटी का कोयला ही मिल रहा है। ‘द लैंसेट’ में 2022 के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में हर साल बाहरी वायु प्रदूषण से 20 लाख से अधिक लोग मारे जाते हैं, जबकि अन्य अध्ययनों से पता चलता है कि कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के आसपास सैकड़ों मील तक बाल मृत्यु दर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। अतः अडानी के मुनाफे की कीमत सीधे जनता अपनी जेब और अपनी जान से चुका रही है। अडानी समूह पर सबसे पहले 2016 में राजस्व आसूचना निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, डीआरआई) द्वारा इंधन की कीमतों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश के आरोप लगाये गए थे। डीआरआई द्वारा भेजे गए नोटिस में आदानी समूह पर आरोप लगाये गए थे कि 50 से 100 फीसदी तक जानबूझ कर कीमतों को बढ़ाया जा रहा है और सरकारी बिजली कंपनियों से ज्यादा पैसे वसूल कर विदेश भेजा जा रहा है। लेकिन डीआरआई द्वारा पेश सबूतों पर सवाल खड़ा करके जांच को रोक दिया गया और इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी अडानी समूह का बाल बांका ना हो सका। अडानी को बचाने के लिए कौन सी ताकतें काम कर रही हैं, आज यह सबको पता है। उपरोक्त अखबार में छपी पिछले साल की रिपोर्ट में लिखा है कि, “डीआरआई जांच की अनसुलझी प्रकृति और [अडानी समूह द्वारा] कथित कार्रवाइयों का बेबाकी से बदस्तूर जारी रहना अडानी और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन के बीच मौजूद संबंधों पर नए सवाल खड़े करता है।” पिछले दस सालों में अडानी की दौलत में हुआ अभूतपूर्व इज़ाफा बिना सरकार के मिलीभगत के संभव ही नहीं है। और बड़े करीने से पिछले दस सालों में मोदी सरकार ने जनता के हितों की बलि दे कर, उन्हें धर्म और जाति आधारित झगड़ों में उलझा कर और, उनका ध्यान भटकाकर चंद मुट्ठीभर चुने हुए वित्तीय पूंजी के मालिकों के लिए बेशर्मी से मुनाफे का साम्राज्य खड़ा किया है। और इसलिए मोदी सरकार को सत्ता में लाने के लिए अडानी-अम्बानी समेत बड़े वित्तीय पूंजीपति अथाह पैसा और संसाधन खर्च करते हैं ताकि बदले में उन्हें बेतहाशा लूट का खुला साम्राज्य मिल सके। इसके लिए जो इसके खिलाफ आवाज उठाये और जनता के जीवन-जीविका और हक अधिकारों का सवाल उठाये उस पर ‘देशद्रोही’ और ‘धर्म-विरोधी’ होने का तमगा लगा कर उनकी आवाजों को कुचल दिया जाये। याद रखिये, अगर मोदी सरकार इस बार वापस आ जाती है तो यह कवायद भीषण गति से आगे बढ़ाई जाएगी और जनता के लिए हर तरफ से नारकीय स्थितियां बना दी जायेंगी। इसे रोकना आज जनता के अस्तित्व की रक्षा से अभिन्न रूप से जुड़ गया है।
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