IFTU Sarwahara (MASA) at Tikri Border

13 March 2021: On the appeal of BKU (Ekta Ugrahan) to workers organizations and trade unions to come on its stage for a day and present their views on the farmers movement in order to display workers-farmers unity, various organisations of MASA and other unions including IFTUS assembled at BKU EU’s stage at Tikri Border (Pakoda Chowk) and unitedly rallied towards the stage.

On behalf of IFTUS, Com Siddhant presented its stand on the farmers movement that while we salute the peasant masses for this historic struggle against their eviction and handing over of agriculture to corporates, the demands raised by this movement cannot be achieved in the present capitalist system and that only a working-class state established through a revolutionary struggle can ensure these demands as well as their liberation as peasants and we must unitedly strive for that. The speech was welcomed by the masses present there with claps and slogans.

Various revolutionary songs were also presented by different cultural activists. Com Ashu (IFTUS) also presented a revolutionary song “Ye Aawam To Kabhi Dara Hi Nahi” written by herself which was warmly greeted with claps and praises along with a monetary gesture from the masses themselves.’Sarwahara’ (IFTUS bulletin, Issue 31) was also distributed among the masses there.


इफ्टू (सर्वहारा) [मासा] टिकरी बॉर्डर पर

13 मार्च 2021: भा.कि.यू. (एकता उग्रहां) के आह्वान पर कि मजदूर-किसान एकता प्रदर्शित करने के लिए मजदूर संगठन व ट्रेड यूनियनें एक दिन के लिए उसके मंच पर आकर मजदूरों की तरफ से अपनी-अपनी बात रखें, मजदूर अधिकर संघर्ष अभियान (मासा) के भिन्न संगठन तथा अन्य यूनियनें जिसमें इफ्टू (सर्वहारा) भी शामिल था, टिकरी बॉर्डर (पकौड़ा चौक) पर इकट्ठा हुए और जुलूस करते हुए मंच तक पहुंचे।

इफ्टू (सर्वहारा) की कर से साथी सिद्धांत ने वक्तव्य पेश किया जिसमें जारी किसान आंदोलन पर हमारा पक्ष स्पष्ट रूप से रखा गया। बेदखली और कॉर्पोरेट के हाथ में कृषि क्षेत्र को सौंपने के विरुद्ध किसानों के इस ऐतिहासिक संघर्ष को हमनें सलाम करते हुए यह बताया कि उनकी मांगें दरअसल इस पूंजीवादी व्यवस्था में हासिल होना संभव नहीं है, बल्कि यह सिर्फ मजदूरों-किसानों की भागीदारी वाला एक सर्वहारा राज्य ही हासिल कर सकता है जो एक क्रांतिकारी संघर्ष के बाद ही खड़ा होगा जिसकी तरफ हमें बढ़ना ज़रूरी है। वक्तव्य का किसान श्रोताओं द्वारा गर्मजोशी से तालियों व नारों के साथ स्वागत किया गया।

भिन्न सांस्कृतिक कर्मियों ने क्रांतिकारी गीत भी प्रस्तुत किए जिसमें से एक गीत था ‘आवाम तो कभी डरा ही नहीं’ जो इफ्टू सर्वहारा की साथी आशु द्वारा खुद से लिखा गया है। गीत का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया गया और आशु को जनता द्वारा ही स्नेह भाव से एक आर्थिक पुरस्कार भी दिया गया।सभा में ‘सर्वहारा’ (इफ्टू सर्वहारा बुलेटिन, अंक 31) भी वितरित किया गया।

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