मज़दूरों को उनकी ‘अपनी’ सरकार ने ही त्याग दिया

[एस. वी. सिंह] “चूँकि मज़दूरों कि मौत का कोई आंकड़ा सरकार के पास मौजूद नहीं है, इसलिए उन्हें मुआवजा देने का सवाल ही पैदा नहीं होता” 14 सितम्बर को संसद में श्रम एवं रोज़गार मंत्री संतोष गंगवार का ये बयान सुन कर देश स्तब्ध रह गया। क्या कोई सरकार इतनी निष्ठुर, इतनी संवेदनहीन हो सकती... Continue Reading →

UNORGANIZED ARMY OF MIGRANT WORKERS

S V Singh // “The bourgeoisie has subjected the country to the rule of towns. It has greatly increased the urban population as compared with the rural, and has thus rescued a considerable part of population from the idiocy of rural life.”Marx-Engels, Communist Manifesto It was 8 pm and 24th of March; “They” were glued... Continue Reading →

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