खस्ताहाल मध्य वर्ग और उसकी गिरती आय की स्वीकारोक्ति

संपादकीय | सर्वहारा #71-73 (1 मार्च – 15 अप्रैल 2025) इस संबंध में देश के प्रतिष्ठित अखबारों (जैसे कि इकोनॉमिक टाइम्स और फाइनेंशियल टाइम्स) में छपी पूंजीवादी थिंक-टैंक के एक सदस्य सौरभ मुखर्जी (मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी) की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के मध्य वर्ग की आर्थिक … More खस्ताहाल मध्य वर्ग और उसकी गिरती आय की स्वीकारोक्ति

‘फ्रीबीज-रेवड़ियां’ सिर्फ पूंजीपतियों को ही, गरीब इससे मुफ्तखोर बनते हैं! 

संपादकीय | ‘यथार्थ’ पत्रिका (जनवरी-मार्च 2025) बजट व अन्य आर्थिक नीतियां – ‘फ्रीबीज-रेवड़ियां’ सिर्फ पूंजीपतियों-अमीरों को ही, गरीब इससे मुफ्तखोर बनते हैं! – फासीवादी दौर का ‘वेलफेयर’ मॉडल सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चुनावों के पहले मुफ्त चीजें या फ्रीबीज देने के राजनीतिक दलों के वादे पर नाराजगी जताई और कहा कि लोग काम … More ‘फ्रीबीज-रेवड़ियां’ सिर्फ पूंजीपतियों को ही, गरीब इससे मुफ्तखोर बनते हैं! 

नई आर्थिक नीतियों के बारे में एक बार फिर से

अजय सिन्हा | ‘यथार्थ’ पत्रिका (जनवरी-मार्च 2025) आम तौर पर 1991 में नरसिम्हा राव की सरकार के दौर की आर्थिक नीतियों पर चर्चा होती है, तो प्राय: तत्कालीन भारतीय अर्थव्यवस्था के वास्तविक कार्यचालन (actual working) को उजागर करने पर हमारा ध्यान न के बराबर होता है। ध्यान महज नीतियों के अच्छे या बुरे होने पर … More नई आर्थिक नीतियों के बारे में एक बार फिर से

देश और दुनिया में आर्थिक विकास दर में आई कमी और इसके निहितार्थ

संपादकीय | ‘सर्वहारा’ #64-65 (1 दिसंबर 2024) विश्व आर्थिक फोरम (World Economic Forum) ने इस साल के 10 सितंबर को प्रकाशित अपने साप्ताहिक आर्थिक एवं वित्तीय सर्वे में कहा है कि 2024 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में पिछले साल की तुलना में “और अधिक” गिरावट आएगी। रायटर सर्वे भविष्यवाणी (Reuter’s Poll Forecast) ने अगले … More देश और दुनिया में आर्थिक विकास दर में आई कमी और इसके निहितार्थ

जीएसटी : मजदूरों के खिलाफ सत्ताधारी व विपक्षी बुर्जुआ दलों की एकता

मुकेश असीम | ‘सर्वहारा’ #60-61 (1-31 अक्टूबर 2024) भारत की मौजूदा व्यवस्था अर्थात पूंजीवादी जनतंत्र में विभिन्न चुनावी दलों के बीच सत्ता में आने के लिए परस्पर होड़ चलती रहती है और जनता को अपने पक्ष में लाने के लिए वे एक दूसरे के खिलाफ बहुत कुछ बयानबाजी भी करते हैं। कई बयान आम जनता … More जीएसटी : मजदूरों के खिलाफ सत्ताधारी व विपक्षी बुर्जुआ दलों की एकता

वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट : आज गरीबी छुपाये नहीं छुप रही

संपादकीय | ‘सर्वहारा’ #60-61 (1-31 अक्टूबर 2024) वर्ल्ड बैंक ने वैश्विक गरीबी पर विगत 15 अक्टूबर को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 2024 में भारत में 12 करोड़ 90 लाख (129 मिलियन) लोगों की दैनिक मजदूरी 181 रुपये (2.15 डॉलर) से भी कम है। अपने आप में यह एक बहुत बड़ी संख्या है। … More वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट : आज गरीबी छुपाये नहीं छुप रही

उच्च विकास दर के साथ उच्च बेरोजगारी दर

संपादकीय | ‘सर्वहारा’ #58 (1 सितंबर 2024) विकास दर में वृद्धि से रोजगार और आम जनता के विकास का बचा-खुचा रिश्ता भी अब खत्म हो गया है। एशिया के सबसे तेज विकास दर वाले देश – खासकर चीन, बांग्लादेश और भारत – उच्च युवा बेरोजगारी दर से पीड़ित हैं। इन दिनों भारत सबसे उच्च दर … More उच्च विकास दर के साथ उच्च बेरोजगारी दर

महंगाई कम होने का झूठा प्रचार

✒️ एम. असीम | ‘सर्वहारा’ #57 (16 अगस्त 2024) गुजरे जुलाई महीने की खुदरा महंगाई दर सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3.54% घोषित की गई है। जून महीने में यह दर 5.08% बताई गई थी। इसके बाद से सरकारी व निजी पूंजीपतियों के सभी प्रचार माध्यमों में महंगाई कम होकर 5 साल में सबसे कम हो … More महंगाई कम होने का झूठा प्रचार

बजट 2024: मेहनतकशों व मध्य वर्ग की लूट से पूंजीपतियों की तिजोरी भरने की योजना

✒️ एम. असीम | ‘सर्वहारा’ #56 (1 अगस्त 2024) रोजगार सृजन के नाम पर पूंजीपतियों को लाभ एवं बेरोजगारों से क्रूर मजाक नरेंद्र मोदी सरकार ने 23 जुलाई को अपने तीसरे कार्यकाल का पहला सालाना बजट पेश किया और पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि उसकी जनविरोधी नीतियों की वजह से आम जनता में जो … More बजट 2024: मेहनतकशों व मध्य वर्ग की लूट से पूंजीपतियों की तिजोरी भरने की योजना

गैरबराबरी की खाई और फुंफकारता फासीवाद – एक सिक्के के दो पहलू

✒️ संपादकीय | ‘सर्वहारा’ #56 (1 अगस्त 2024) अश्लील स्तर पर जा पहुंची आर्थिक गैर-बराबरी की खाई और पूरी दुनिया में अपने पांव पसारता व फुंफकारता फासीवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ऑक्सफैम ने 25 जुलाई 2024 के अपने प्रेस वक्तव्य में कहा है कि “दुनिया के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों ने … More गैरबराबरी की खाई और फुंफकारता फासीवाद – एक सिक्के के दो पहलू