बजट 2024: मेहनतकशों व मध्य वर्ग की लूट से पूंजीपतियों की तिजोरी भरने की योजना

✒️ एम. असीम | ‘सर्वहारा’ #56 (1 अगस्त 2024) रोजगार सृजन के नाम पर पूंजीपतियों को लाभ एवं बेरोजगारों से क्रूर मजाक नरेंद्र मोदी सरकार ने 23 जुलाई को अपने तीसरे कार्यकाल का पहला सालाना बजट पेश किया और पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि उसकी जनविरोधी नीतियों की वजह से आम जनता में जो … More बजट 2024: मेहनतकशों व मध्य वर्ग की लूट से पूंजीपतियों की तिजोरी भरने की योजना

गैरबराबरी की खाई और फुंफकारता फासीवाद – एक सिक्के के दो पहलू

✒️ संपादकीय | ‘सर्वहारा’ #56 (1 अगस्त 2024) अश्लील स्तर पर जा पहुंची आर्थिक गैर-बराबरी की खाई और पूरी दुनिया में अपने पांव पसारता व फुंफकारता फासीवाद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। ऑक्सफैम ने 25 जुलाई 2024 के अपने प्रेस वक्तव्य में कहा है कि “दुनिया के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों ने … More गैरबराबरी की खाई और फुंफकारता फासीवाद – एक सिक्के के दो पहलू

सीढ़ियां (कविता)

✒️ सुकांत भट्टाचार्य (क्रांतिकारी कवि के 98वें जन्मदिन पर प्रस्तुति) हम सीढ़ियां हैं —  तुम हमें पैरों तले रौंदकर  हर रोज बहुत ऊपर उठ जाते हो  फिर मुड़कर भी नहीं देखते पीछे की ओर  तुम्हारी चरणधूलि से धन्य हमारी छातियां  पैर की ठोकरों से क्षत-विक्षत हो जाती हैं — रोज ही।  तुम भी यह जानते … More सीढ़ियां (कविता)

बांग्लादेश में भीषण बेरोजगारी झेल रहे युवाओं का फूटा गुस्सा

✒️ आकांक्षा | ‘सर्वहारा’ #56 (1 अगस्त 2024) आंदोलन की फौरी वजह बना मुक्ति संग्राम सेनानियों का आरक्षण; अंतर्य में है विकराल होती बेरोजगारी बांग्लादेश में पिछले कई हफ्तों से छात्रों-युवाओं द्वारा सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई छेड़ी जा चुकी है। इस संघर्ष का फौरी कारण बना बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के सेनानियों को दिया … More बांग्लादेश में भीषण बेरोजगारी झेल रहे युवाओं का फूटा गुस्सा

डर (कविता)

✒️ हूबनाथ | ‘सर्वहारा’ #55 (16 जुलाई 2024) डर डराता ही नहीं सिखाता भी है कि डर के माहौल में कितना महत्वपूर्ण होता है धीरज कैसे बंधी रहती है हिम्मत यकीन में पड़ी दरारें कैसे मिटाई जाती हैं डर कसौटी है आस्था की विश्वास की मानवता की डर के माहौल में भी बची रही जिसकी … More डर (कविता)

बंदर (कविता)

✒️ अशोक कुमार | ‘सर्वहारा’ #55 (16 जुलाई 2024) सच ही कहा था डार्विन ने पहले आदमी बंदर था फिर आदमी हुआ विकास की इस दौड़ में जो पिछड़ गए वो बंदर ही रह गए बंदर से जो आदमी हो गए थे लगता है उनमें से कुछ फिर से बंदर होने की उल्टी यात्रा पर … More बंदर (कविता)

ग्रीस में सप्ताह में 6 दिन काम का नया कानून

✒️ रविन्द्र गोयल | ‘सर्वहारा’ #55 (16 जुलाई 2024) यदि आप सोचते हैं कि मजदूरों को ज्यादा खटाया जाने का बाजा नारायण मूर्ति जैसे पूंजीपति या उनकी दलाल मोदी सरकार ही बजा रही है तो आप शायद गलत फहमी में हैं। यह तो अभी पूरे दुनिया के पूंजीपतियों का प्रिय शगल बन गया है। एक … More ग्रीस में सप्ताह में 6 दिन काम का नया कानून

“हमारा जीवन कैसे चलेगा यह भी मालिक तय करते हैं”

पटना के एक निर्माण मजदूर से साक्षात्कार पर आधारित ✒️ ‘सर्वहारा’ #55 (16 जुलाई 2024) मेरा नाम किशोरी महतो है और मैं बख्तियारपुर का रहने वाला हूं। मैं राजमिस्त्री का काम करता हूं। मेरे घर में मेरी पत्नी, बूढ़ी मां और दो छोटे बच्चे हैं। घर में कमाने वाला मैं अकेला व्यक्ति हूं। पिछले महीने … More “हमारा जीवन कैसे चलेगा यह भी मालिक तय करते हैं”

गरीबों के महासमुद्र में अमीरों के एक छोटे टापू में तब्दील होता भारत

✒️ संपादकीय | ‘सर्वहारा’ #55 (16 जुलाई 2024) अभी दो या तीन दिन पहले की ही बात है जब भारत के दो सबसे बड़े अमीरों में से एक मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी वीरेन मर्चेंट की बेटी राधिक मर्चेंट से संपन्न हुई, जिसमें यह दिखा कि भारत किस तरह गरीबों के महासमुद्र … More गरीबों के महासमुद्र में अमीरों के एक छोटे टापू में तब्दील होता भारत

केन्या में महंगाई के खिलाफ जनता सड़कों पर, पुलिस ने ली 27 की जान

✒️ आकांक्षा | ‘सर्वहारा’ #54 (1 जुलाई 2024) केन्या में सरकार द्वारा लाये गए नए फाइनेंस बिल 2024 के खिलाफ विगत 25 जून को जनता भारी संख्या में सड़कों पर उतर गयी। यह बिल ऐसा है जिससे मूलभूत चीजों जैसे ब्रेड, खाने का तेल, बच्चों के डायपर, महिलाओं के सैनीटरी पैड, आदि के दाम बढ़ … More केन्या में महंगाई के खिलाफ जनता सड़कों पर, पुलिस ने ली 27 की जान