अर्थव्यवस्था को मजदूर चलाते हैं पूंजी नहीं

एस. वी. सिंह // विस्थापित मजदूरों पर हो रहे जुल्मों की व्यथा की एक से बढ़कर एक भीषण हृदयविदारक रिपोर्ट आना बंद नहीं हो रहीं। उनकी मौत और विनाश की ऐसी दिल दहलाने वाली, सच्चाईयां उजागर हो रही हैं जिनको किसी भी जिंदा इन्सान को सहन करना मुमकिन नहीं। देशभर से दिन रात हर वक्त … More अर्थव्यवस्था को मजदूर चलाते हैं पूंजी नहीं

मजदूर-विरोधी श्रम सुधारों की महामारी

एस. राज // पूरे विश्व में फैले कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप ने दुनिया भर में तालाबंदी जैसी स्थिति सामान्य बना दी है। इस तालाबंदी में लगभग सभी उत्पादन संबंधित गतिविधियां अभूतपूर्व स्तर पर ठप पड़ी हैं जिसके कारण पहले से ही एक गंभीर संकट से जूझ रही विश्व पूंजीवादी व्यवस्था को इस महामारी और … More मजदूर-विरोधी श्रम सुधारों की महामारी

22 मई 2020 अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन : केंद्रीय ट्रेड यूनियनें, अब यहां से किधर?

शेखर // 22 मई की अखिल भारतीय मजदूर हड़ताल बेहद विषम और प्रतिकूल परिस्थितियों में बुलाई गयी थी। इसका आह्वान दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, जिसमे मुख्यतः मुख्य धारा के वाम दल बहुलता में हैं, के द्वारा किया गया, जिसमें लगभग सभी ट्रेड यूनियनों और ट्रेड यूनियन मोर्चों, चाहे वे जिससे भी संबद्ध हों, ने भाग … More 22 मई 2020 अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन : केंद्रीय ट्रेड यूनियनें, अब यहां से किधर?

क्या अमेरिका क्रांति के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है?

अमेरिका में 25 मई 2020 को अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस अधिकारि‍यों द्वारा गर्दन दबाकर की गई बेरहम हत्या के बाद दूसरे सप्‍ताह में भी विरोध प्रदर्शन तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। जॉर्ज फ्लॉयड आज अमेरिका में न्याय और बराबरी तथा शोषण व अत्‍याचार के अंत की मांग के प्रतीक बन चुके हैं। … More क्या अमेरिका क्रांति के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है?

‘केरला मॉडल’: कोविड-19 शायद इसका जीवनकाल बढ़ा दे

प्रसाद वी. // केरल भारत के उन कुछ राज्यों में से एक है जहां सरकार ने कोरोना वैश्विक महामारी से लड़ने हेतु कुछ गंभीर प्रबंध किया है और इन प्रयासों का अच्छा परिणाम भी प्राप्त हुआ है। इस लेख को लिखने के दौरान भी केरल में संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पर … More ‘केरला मॉडल’: कोविड-19 शायद इसका जीवनकाल बढ़ा दे

भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ता पूंजी संकेंद्रण

एम. असीम // ‘भारत ‘भारत की 20 सर्वाधिक लाभप्रद फ़र्म आज देश के कुल लाभ का 70% उत्पन्न करती हैं, जो 30 साल पहले 14% ही था। भारत में अंतरगुंफित अर्थव्यवस्था (हाइवे, सस्ती उड़ानें, ब्रॉडबैंड, जीएसटी) के उदय ने बड़ी, कुशल फर्मों को श्रेष्ठ तकनीक और अधिक पूंजी के प्रयोग द्वारा छोटे प्रतिद्वंद्वियों को मसल … More भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ता पूंजी संकेंद्रण

‘आपदा से अवसर’ – नवउदारवादी हमला और तेज

एम. असीम // 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में लीमान ब्रदर्स के दिवालिया होने के वक्त बहुत से भलेमानुसों का सोचना था कि अपने इस संकट की वजह से अब नवउदारवाद कदम पीछे हटाने को विवश होगा। मगर तभी ओबामा के चीफ ऑफ स्टाफ और वित्तीय क्षेत्र के पूर्व बड़े प्रबंधक राम इमैनुएल … More ‘आपदा से अवसर’ – नवउदारवादी हमला और तेज

विरोध की आवाज पर हमले : “उन्होंने हमें दफनाने की कोशिश की, उन्हें नहीं मालूम था हम बीज हैं”

ए. प्रिया // इस नवीन दशक की पूर्वसंध्या से ही दुनिया भर में विरोध की एक बड़ी लहर फैली है। भारत में भी 2019 ने शुल्क वृद्धि और शिक्षा के निजीकरण के विरुद्ध छात्रों के विरोध से शुरू कर अंत में एनआरसी-सीएए-एनपीआर के विरुद्ध विरोध के रूप में हालिया भारतीय इतिहास का व्यापकतम जनआंदोलन भी … More विरोध की आवाज पर हमले : “उन्होंने हमें दफनाने की कोशिश की, उन्हें नहीं मालूम था हम बीज हैं”

Nationwide Protest Against Repression on Anti CAA activists & Democratic Voices of Dissent (3rd June ’20)

#SAB_YAAD_RAKHA_JAEGA #IFTU_S / #PDYF / #PDSF / #Vimukta Free all arrested anti-CAA activists and political prisoners! Stop repression on students, activists and democratic voices of dissent! Arrest the actual culprits of Delhi Pogrom! Scrap UAPA and all repressive laws! Scrap all anti-worker labour reforms! Scrap CAA-NRC-NPR! Immediate attention to the plight of workers and poor … More Nationwide Protest Against Repression on Anti CAA activists & Democratic Voices of Dissent (3rd June ’20)

ECONOMY IS DRIVEN BY MIGRANT WORKERS, NOT BY CAPITAL

S V Singh // Heart wrenching tales, each more gory than the previous one, of the atrocities, the migrant workers were subjected to, don’t cease coming. The trail of their death and devastation is unbearable to fathom to any sane and sensitive mind, to any living individual. Newer and newer scripts of their colossal sufferings … More ECONOMY IS DRIVEN BY MIGRANT WORKERS, NOT BY CAPITAL