मई दिवस पर सर्वहारा जनमोर्चा द्वारा जयपुर में गोष्ठी

जयपुर, 4 मई 2025: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की 139वीं वर्षगांठ पर सर्वहारा जनमोर्चा की जयपुर इकाई द्वारा कामरेड प्यारेलाल शकुन की पहल और संचालन से समग्र सेवा संघ परिसर सभागार में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कामरेड प्रेम किशन शर्मा (अधिवक्ता) ने गोष्ठी की अध्यक्षता की जिसमें साथी महेश चौमाल, सवाई सिंह (अध्यक्ष, समग्र सेवा संघ), अमृत लाल अटोरिया (पूर्व डी एस ओ), राम निवास दहिया, राम प्रकाश बौद्ध, अनिल यादव, प्रोफेसर श्रीगोपाल मोदानी, राम लाल चौधरी, एवं सुरेश कुमार ने सक्रियता से भाग लिया।

ऐतिहासिक मई दिवस आंदोलन, जिसने 8 घंटे कार्यदिवस को दुनिया भर में लागू करने हेतु पूंजीपति शासक वर्ग को मजबूर करने वाले संघर्षों की नींव ही नहीं रखी, बल्कि मजदूर वर्ग के शोषण पर टिकी पूंजीवादी व्यवस्था को भी चुनौती दी, के इतिहास और उसके महत्व पर चर्चा हुई। साथी प्यारेलाल शकुन ने गोष्ठी का संचालन करते हुए बताया कि मजदूर वर्ग की पूंजीवादी व्यवस्था से मुक्ति तभी संभव है जब उत्पादन के साधनों से निजी स्वामित्व को हटा कर सामाजिक स्वामित्व के दायरे में लाया जाए, किंतु इसकी पूर्वशर्त है कि राज्यसत्ता पर कब्जा मजदूर वर्ग का हो। उन्होंने कहा कि कार्ल मार्क्स ने पेरिस कम्यून में मजदूर वर्ग के राजनीतिक अनुभव के आधार पर निष्कर्ष निकाला था कि मजदूर वर्ग पूंजीपति वर्ग के राज्य की बनी बनाई मशीनरी को अपने काम में नहीं ले सकता, बल्कि उसे अपने राज के लिए इस पुरानी मशीन को ध्वस्त करना होगा।

साथी अमृत लाल अटोरिया ने बताया कि मजदूरों को आज मजदूर कोई नहीं कहता बल्कि सभी उसे उसकी जाति से पहचानते हैं। जैसे जब किसी सफाई मजदूर की गटर साफ करते हुए मृत्यु हो जाए तो उसे “वाल्मीकि, भंगी, हरिजन” आदि के नाम से संबोधित किया जाता है। इसके बदले मजदूर वर्ग को अपनी वर्गीय पहचान को सबसे आगे करने की आज फौरी जरूरत है। साथ ही आज देश दुनिया की परिस्थिति, जहां दिन ब दिन विश्व पूंजीवादी व्यवस्था का संकट गहराता जा रहा है और इसका बोझ आम मेहनतकश जनता पर डाल कर उनका जीवन लगातार नारकीय बनाया जा रहा है, में आज अपने कार्यभारों को लेकर भी ठोस बातचीत हुई।

कामरेड प्रेम कृष्ण शर्मा ने सुझाव दिया कि जयपुर में सर्वहाराओं व आम मेहनतकश जनता के बीच एक सर्वेक्षण किया जाए जिससे उनकी जीवन जीविका की स्थिति पर ठोस जानकारी मिलने के साथ आगे आंदोलन की रूप रेखा बनाई जा सके। सभी साथियों ने इन मुद्दों पर सर्वेक्षण व अभियान शुरू करने पर सहमति जताई –

  • शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और आवास की गारंटी को संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में ही नहीं जोड़ा जाए, बल्कि यह समस्त जनता को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए। समान स्कूल प्रणाली लागू की जाए।
  • सरकार सभी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण करे और उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं व सामाजिक सुरक्षा दे। आज पंजीकरण के लिए ठेकेदार की सिफारिश चाहिए और जो मजदूर ठेकेदार के नियंत्रण में काम नहीं करता, सरकारी नियम के अनुसार वह मजदूर कार्ड का हकदार नहीं है। अतः ठेकेदारी प्रथा रद्द की जाए।

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