दिल्ली बॉर्डर पर इफ्टू (सर्वहारा)

एस. राज /

जारी किसान आंदोलन में मजदूर वर्गीय हस्तक्षेप (18-26 जनवरी 2021)

इंडियन फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियंस (सर्वहारा) [इफ्टू (सर्वहारा)] द्वारा जारी किसान आंदोलन में मजदूर-वर्गीय दृष्टिकोण से हस्तक्षेप करने हेतु एक जमीनी अभियान का आयोजन किया गया। इस हस्तक्षेप का लक्ष्य था मजदूर वर्ग के प्रतिनिधि होने के बतौर किसानों की मुक्ति और उसमें मजदूर वर्ग की भूमिका पर अपनी समझ को आंदोलन में प्रस्तुत करना। अभियान का पहला चरण दिल्ली में 18 जनवरी 2021 से शुरू हुआ और 26 जनवरी तक चला।अभियान के तहत बॉर्डर प्रोटेस्ट स्थलों पर बैठे आंदोलनरत किसान व दिल्ली एनसीआर में मजदूर-मेहनतकश जनता के बीच व्यापक प्रचार के लिए इफ्टू (सर्वहारा) के हिंदी में तैयार किए गए केंद्रीय पर्चे को छपवाया गया, जिसका शीर्षक था ‘मजदूर वर्ग, संघर्षरत किसानों तथा आम आवाम से आह्वान : तमाम किसान-विरोधी, मजदूर-विरोधी व जन-विरोधी कानूनों एवं इनके उद्गम स्रोत के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें!’ इसके साथ पीआरसी, सीपीआई (एमएल) द्वारा प्रकाशित पुस्तिका – ‘किसानों की मुक्ति और मजदूर वर्ग’ – को भी किसान आंदोलन एवं वाम व क्रांतिकारी आंदोलन के नेतृत्वकारी तत्वों के बीच लक्षित वितरण के लिए छपवाया गया। ‘यथार्थ’ पत्रिका के अंक 9 (जनवरी 2021) में पुस्तिका की अंतर्वस्तु को कुछ बदलाव के साथ प्रकाशित किया गया था और ‘द ट्रुथ’ पत्रिका के अंक 10 (फरवरी 2021) में पुस्तिका के अंग्रेजी अनुवाद को प्रकाशित किया गया है। अपने पर्चों, पुस्तिका, भाषणों व बैठकों के माध्यम से हमनें बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों (और दिल्ली एनसीआर के मजदूरों) के सामने स्पष्ट रूप से यह बात रखी कि हालांकि हम, एक क्रांतिकारी वर्ग – मजदूर वर्ग – के प्रतिनिधि होने के बतौर, अपनी जमीन और कृषि से खुद की बेदखली के खिलाफ आपके ऐतिहासिक संघर्ष और समझौताहीन तरीके से इसे इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए आपको सलाम पेश करते हैं, हमें यह समझना जरूरी है कि किसानों की एक बड़ी आबादी पर छाए संकट और किसानों के बीच अपनी जमीन से बेदखली के उचित डर की जड़ पूंजीवाद और पूंजीवादी खेती है। क्योंकि पूंजी की स्वाभाविक गति केंद्रीकरण व संकेंद्रण की होती है जिसके तहत कल तक की बड़ी मछलियों (धनी किसान), जो अब तक छोटी मछलियों को निगल रहे थे, का सामना अब कॉर्पोरेट शार्कों से होने वाला है, उनकी मांगों की पूर्ति शोषण पर टिकी इस व्यवस्था में संभव नहीं है। अगर मोदी सरकार किसी कारण से नए कृषि कानून वापस भी ले लेती है तो भी यह अस्थाई राहत ही होगी क्योंकि ऐसी नीतियों को किसी भी कीमत पर बेधड़क लागू करवाने के लिए ही इसके कॉर्पोरेट आकाओं ने मोदी सरकार को सत्तासीन करने हेतु अपनी तिजोरियां खोली थीं और हैं। हमारे द्वारा यह भी कहा गया कि – समस्त कृषि उत्पाद की एक तय मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी और अपनी जमीन व कृषि से बेदखली के जायज डर से मुक्ति केवल किसानों की भागीदारी वाले एक सर्वहारा राज्य में ही मिल सकती है। अतः किसान आंदोलन के मुख्य मांगों की वास्तविक पूर्ति और किसानों की (किसान बने रहते ही) मुक्ति का रास्ता पूंजीवाद के खात्मे के रास्ते से ही हो कर जाता है, जिसका तार्किक अंत एक सर्वहारा राज्य की स्थापना करने हेतु मजदूर वर्ग के नेतृत्व में पूंजीवाद के विरुद्ध एक निर्णायक संघर्ष में एकजुट होना है।इफ्टू (सर्वहारा) की टीम सिंघु, टिकरी व गाजीपुर बॉर्डर गई और पहले दो बॉर्डरों पर भिन्न किसान व छात्र संगठनों के तंबुओं में रात भी गुजारी। हर आंदोलन स्थल पर जो समान बात थी, वो थी जोश और उत्साह का सर्वव्यापी माहौल : मंच पर चल रहे भाषाओं व नारों की बुलंद आवाज लाउडस्पीकरों से आती हुईं, भिन्न सामग्रियों वाले लंगर तमाम जगहों लगभग लगातार चलते हुए, 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए गांव से लंबा सफर तय करते हुए ट्रैक्टरों व ट्रॉलियों का लगातार आगमन, उनके स्पीकरों से इस आंदोलन पर बने भिन्न पंजाबी व हरयाणवी गानों की गर्जन (जिनमें से दो सबसे लोकप्रिय थे ‘किसान एंथम’ और ‘हम दिल्ली आगए’)। इसके साथ रात तक किसानों द्वारा आपस में बातचीत और देश-दुनिया में किसान आंदोलन के इर्द-गिर्द हो रहे बदलावों व अपने नेताओं की सरकार से वार्ता की जानकारी पाने के लिए देखे जा रहे समाचार चैनलों की आवाज से तंबू व ट्रॉलियां से हर वक्त चहल-पहल रहती थी। भिन्न संगठनों द्वारा आंदोलन स्थलों पर ही पुस्तकालय शुरू कर दिए गए हैं जिनके पीछे मुख्यतः वाम संगठन (प्रगतिशील साहित्य पेश करते हुए) और सिख संगठन (सिख साहित्य पेश करते हुए हैं) हैं। बॉर्डरों के आंदोलन स्थलों पर रात गुजारने की जगह व सुविधाओं (टेंट, कंबल आदि) के लिए आंदोलनरत जनता पर और खाने-पीने के लिए लंगर व चाय की असीम प्रतीत होने वाली सेवा पर पूरी तरह निर्भर रहते हुए हमें सक्रियता से बॉर्डरों पर अभियान के कार्य को संपन्न किया।पर्चों और पुस्तिका के वितरण के अलावा, हमारे साथियों ने सिंघु व टिकरी बॉर्डर के मुख्य मंच से इस आंदोलन पर हमारी उपरोक्त समझ को सामने लाते हुए वक्तव्य भी रखे। इन भाषणों का वहां की संघर्षरत किसान जनता ने तालियों व इंकलाब जिंदाबाद! मजदूर-किसान एकता जिंदाबाद! पूंजीवाद हो बर्बाद! के नारे लगाते हुए गर्मजोशी से स्वागत किया। टिकरी बॉर्डर पर हमारे द्वारा नेशनल हाईवे पर ही लगे किसानों के तंबुओं के बीच एक नुक्कड़ सभा का आयोजन हुआ जिसमें वहां के संघर्षरत किसानों और आस-पास की जनता ने हिस्सा लिया। गाजीपुर बॉर्डर पर हमनें अपने झंडे व बैनर के साथ मंच (जो उस वक्त चालू नहीं था) के पास एक जुलूस प्रदर्शन आयोजित किया जिसे शुरू करते ही वहां की कुछ बिखरी हुई संघर्षरत किसान आबादी सैकड़ों में हमारे इर्द-गिर्द इकट्ठा हो गई और पूंजीवाद-साम्राज्यवाद-फासीवाद के विरुद्ध और इंकलाब जिंदाबाद के हमारे नारों को दोहराने लगी। इसके फलस्वरूप गाजीपुर बॉर्डर, खास कर मंच के सामने वाला क्षेत्र, क्रांतिकारी नारों की गर्जन से गूंज उठा।दिल्ली एनसीआर के अंदर भी मजदूर-मेहनतकश आबादी के समक्ष इफ्टू (सर्वहारा) द्वारा इस अभियान को ले जाया गया। ‘दिल्ली फॉर फार्मर्स’, जो दिल्ली के अंतर्गत किसान आंदोलन के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित करने के मकसद से जनवरी 2021 में गठित किया हुआ तमाम प्रगतिशील क्रांतिकारी संगठनों का साझा मंच है और जिसमें इफ्टू (सर्वहारा) भी शामिल है, के आह्वान के तहत किसानों के 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड के समर्थन में ‘दिल्ली फॉर किसान परेड’ (किसान परेड के समर्थन में दिल्ली) अभियान का 23 से 25 जनवरी के बीच दिल्ली के हर जिले में आयोजन हुआ। इफ्टू (सर्वहारा) ने इस अवधि में मायापुरी, द्वारका और फरीदाबाद की मजदूर बस्तियों में अभियान को चलाया। 26 जनवरी 2021 को किसानों द्वारा सभी बॉर्डर आंदोलन स्थलों से दिल्ली के अंदर ट्रैक्टर परेड का आयोजन किया गया और इसी के साथ इफ्टू (सर्वहारा) के अभियान का पहला चरण समाप्त हुआ।अभियान का दूसरा चरण ‘किसान आंदोलन एवं मजदूर जन-जागरण अभियान’ के नाम से 25 जनवरी से 5 फरवरी 2021 के बीच संपन्न किया गया है। इसके तहत इफ्टू (सर्वहारा) का नया पर्चा ‘आम किसानों की बर्बादी पूंजीवादी कृषि की देन है, इससे मुक्ति का एकमात्र रास्ता मजदूर-मेहनतकशों के सर्वहारा राज्य से होकर जाता है’ शीर्षक से जारी किया गया। पटना, दिल्ली और प. बर्धमान (प. बंगाल) में यह जन-जागरण अभियान संपन्न किया गया। इसके साथ भावी कार्यक्रमों के लिए किसान आंदोलन पर इफ्टू (सर्वहारा) का तीसरा पर्चा ‘देश की जनता के नाम आह्वान : शांति व दृढ़ इरादों के साथ आंदोलन में डटे किसानों के साथ एकजुटता दिखाएं!’ शीर्षक से जारी हो चुका है।6 फरवरी 2021 को 12 से 3 बजे ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के देशव्यापी चक्का जाम के आह्वान के तहत भी इफ्टू (सर्वहारा) जमीन पर सक्रिय रहा। प. बर्धमान के हरिपुर में एक जुलूस व पथ सभा का आयोजन किया गया। दिल्ली में दिल्ली फॉर फार्मर्स की तरफ से शहीदी पार्क में एकजुटता सभा का आह्वान था लेकिन कार्यक्रम के शुरू होते ही पुलिस ने जबरन लगभग सभी 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और राजेन्द्र नगर थाने ले आए। प्रदर्शनकारियों ने थाने के परिसर में ही क्रांतिकारी नारों, गीतों और भाषणों के साथ प्रदर्शन को संपन्न किया। पटना में बाईपास (90 फ़ीट रोड) पर लगभग सौ की संख्या में इफ्टू (सर्वहारा) ने रैली का आयोजन किया। पटना के अन्य सभी संगठनों ने हाईवे पर जुटने का कॉल दिया था लेकिन वे उधर आने के बजाए शहर में ही रहे। उनकी गैरहाज़िरी से हाईवे जाम करने के लिए जितनी संख्या चाहिए थी उतनी नहीं जुटी। इसके बावजूद इफ्टू (सर्वहारा) ने चक्का जाम में उत्साह और समर्पण से भाग लिया और कार्यक्रम को सफल बनाते हुए हाईवे पर प्रदर्शन और सभा की।सीमित ताकत होने के बावजूद इफ्टू (सर्वहारा) द्वारा किसान आंदोलन में एक सार्थक हस्तक्षेप करने के लक्ष्य से शुरू किए गए अभियान के दो चरण संपन्न हो चुके हैं। इसका महत्व एवं इसके परिणाम व प्रभाव क्या होंगे यह आने वाले समय में और किसान आंदोलन के और अधिक तीव्र होने पर ही पूरी तरह पता चलेगा। अभी तक के महत्वपूर्ण अनुभवों से और भी अधिक स्पष्ट समझ बनाते हुए आगे भी यह प्रयास भिन्न रूपों में जारी रहेगा।

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