[NEP 2020 पर बयान] राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा का निजीकरण-भगवाकरण का भंडाफोड़!

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा का निजीकरण-भगवाकरण का भंडाफोड़!

मौजूदा श्रेणीबद्ध शिक्षा-रोजगार व्यवस्था को तोड़ो!

सभी देशवासियों के लिए समान, सुलभ और वैज्ञानिक शिक्षा के लिए संघर्ष करो!

दिनांक: जुलाई 31, 2020

मित्रों और साथियों,

केंद्र सरकार की मंत्रिपरिषद द्वारा जुलाई 21, 2020 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अनुमोदित कर दिया गया और यह जोर-शोर से घोषणा की गई कि यह नई शिक्षा नीति प्राथमिक स्तर से उच्च शिक्षा तक, शिक्षा का कायापलट कर देगी। लेकिन NEP 2020 को ध्यान से देखने और पढ़ने से यह पता चलता है कि कैसे यह नीति भी सत्तारूढ़ आरएसएस-भाजपा द्वारा सार्वजनिक शिक्षा को तहस-नहस करने के ट्रैक रिकॉर्ड को बरक़रार रखता है। NEP 1986 का जनविरोधी और पूंजीपति-हितैषी चरित्र नए नीति में भी मौजूद है, बल्कि सामान और वैज्ञानिक शिक्षा पर धार्मिक कट्टरपंथियों और बाज़ार परस्तो के हमलों को और तीखा करती है। NEP 2020 आने वाली पीढ़ी के शिक्षा में मूलभूत बदलाव कर, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद और समाजवाद जैसे मूल विचारों को ही ख़तम करना चाहती है।

इस समय, जब बेरोज़गारी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार की कमी पिछले 4 दशकों में सबसे ज्यादा है, उस वक़्त व्यवसायिक (अर्थात ‘vocational’) शिक्षा, परिशिक्षण-आधारित शिक्षा और अन्य तरह के बाज़ार-आधारित शिक्षा नीतियों पर जोर दिया जा रहा है, जो अपने आप में हास्यास्पद लगता है। इस तरह, यह शिक्षा नीति एक असमान आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को एक नए नाम के साथ बनाए रखने की कल्पना करता है । इसके अलावा, सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों में ‘समत्व’ और वित्तीय ‘स्वायत्तता’ के नाम पर, सार्वजनिक विश्वविद्यालय में रिसर्च में फंड कटौती और शिक्षा से मुनाफ़ाखोरी और छात्र- छात्राओं के शोषण के लिए बहुराष्ट्रीय शिक्षा व्यापारियों के प्रवेश के लिए भारतीय शिक्षा के द्वार खोला जा रहे हैं ।

COVID-19 महामारी के समय का उपयोग इस सत्ता द्वारा पिछले कुछ महीनों में हर क्षेत्र में बड़े बदलावों को लागू करने के लिए एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया गया है। 44 श्रम कानूनों को समाप्त करके श्रमजीवियों की बुनियादी सुरक्षा को मिटा दिया गया है, बैंकिंग और रेलवे जैसे और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निजीकरण अभियान शुरू किया गया है, विधायी बदलावों ने सामाजिक न्याय मानदंडों और नागरिकता के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है और राजनीतिक विरोध का अपराधीकरण किया गया है। हाल के दिनों में, ऑनलाइन परीक्षा को भी जोर और ताकत से आगे ला कर थोपा गया है और स्कूल पाठ्यक्रम में एक विशेष राजनीतिक विचार से प्रेरित बदलाव किये गये है।

मेहनतकश आवाम पर हमले की इस नई लहर को पहचानते हुए, हम नई शिक्षा नीति 2020 के लिए अपने विरोध की पुष्टि करते हैं और संघर्ष जारी रखने की घोषणा करते हैं।

क्रांतिकारी अभिवादन!

  1. अक्षय, आल इंडिया रेवोलुशनरी स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (AIRSO)
  2. श्रेया, कलेक्टिव, नई दिल्ली
  3. सरोवर, कर्नाटक विद्यार्थी संगठन (KVS)
  4. आकाशदीप महतो, मार्क्सिस्ट स्टूडेंट फेडरेशन (MSF), झारखण्ड
  5. दीपक, परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
  6. राधे श्याम, प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (PDSF)
  7. म्रिन्मोय, प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (PDSF), पश्चिम बंगाल
  8. रामाकृष्ण, प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (PDSU)
  9. कविता विद्रोही, स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन फॉर सोशलिस्ट डेमोक्रेसी (SOSD), हरियाणा
  10. अरविन्थ राज, तमिलनाडु स्टूडेंट मूवमेंट (TSM)

To read the statement in English, click here.

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